एक लड़की गाय की दूध निकाल रही है
1: सुबह का गाँव
सुबह का समय है। गाँव के चारों ओर हल्की धुंध छाई हुई है। दूर-दूर तक हरे-भरे खेत फैले हैं। सूरज की सुनहरी किरणें धीरे-धीरे धरती पर उतर रही हैं। पक्षियों की चहचहाहट पूरे वातावरण को जीवंत बना रही है।
2: आँगन का नज़ारा
एक मिट्टी का साफ़-सुथरा आँगन है। आँगन के एक कोने में नीम का पेड़ खड़ा है। उसके नीचे एक लकड़ी की चौकी रखी है। बगल में रस्सी से बँधी हुई एक सफ़ेद-भूरी रंग की गाय खड़ी है, शांत और कोमल नज़र से सब देख रही है।
3: लड़की का बैठना
सादी सलवार-कुर्ती पहने लगभग 17–18 साल की एक गाँव की लड़की चौकी पर बैठती है। उसके चेहरे पर सुबह की ताजगी और हल्की मुस्कान है। उसने बालों को तेल लगाकर चोटी में बाँध रखा है।
4: गाय से लगाव
लड़की पहले धीरे-धीरे गाय की पीठ और गले पर हाथ फेरती है। गाय भी प्यार से अपनी गर्दन हिलाती है और आँखें बंद कर लेती है। लड़की धीरे से बोलती है –
"चल गोरी, अब दूध निकालते हैं।"
5: दूध निकालने की तैयारी
लड़की पास रखी हुई पीतल की बाल्टी उठाती है और गाय के पास रख देती है। फिर पानी की बाल्टी से हाथ धोकर साफ़ करती है। गाय की थन को भी धीरे से पानी से पोंछती है ताकि सफ़ाई बनी रहे।
6: दूध निकालने की शुरुआत
लड़की दोनों हाथों से धीरे-धीरे गाय का दूध निकालना शुरू करती है। छप-छप की आवाज़ के साथ सफ़ेद दूध बाल्टी में गिरता है। पूरा आँगन दूध की ख़ुशबू से भर जाता है।
7: गाँव का माहौल
पास में एक मुर्गा बांग देता है। बच्चे खेलते हुए उधर से गुजरते हैं और हँसते हुए कहते हैं –
"देखो-देखो दीदी दूध दुह रही है।"
लड़की भी हँसकर जवाब देती है।
8: दूध से भरी बाल्टी
धीरे-धीरे बाल्टी दूध से भर जाती है। ऊपर झाग की मोटी परत जम जाती है। लड़की संतोष भरी नज़रों से बाल्टी को देखती है और फिर गाय के माथे पर प्यार से हाथ फेरती है।
9: अंत का दृश्य
लड़की बाल्टी उठाकर घर की ओर चल देती है। गाय संतोष से चरनी में रखा चारा खाने लगती है। सुबह की धूप और गाँव का माहौल इस पूरे दृश्य को और भी सुंदर बना देता है।
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